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उत्तराखंड शासन ने शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 15 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस दौरान गृह सचिव बदले गए, फायर सर्विस और कारागार जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया। शासन के इस कदम को प्रशासनिक व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद माना जा रहा है।
READ MOREउत्तराखंड में राशनकार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत—अब 54 लाख लोग मोबाइल ऐप से घर बैठे ई-केवाईसी कर सकेंगे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने नई तकनीक शुरू की है, जिससे राशन डीलर की दुकानों पर लगने वाली भारी भीड़ खत्म होगी और आइरिस स्कैन से पहचान तुरंत संभव हो जाएगी।
READ MOREरामनगर के कोसी और दाबका नदी क्षेत्र में भूकंप से बड़ा भू-परिवर्तन संभव है। वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी भी बड़े भूकंप की स्थिति में दाबका नदी का बहाव बदलकर कोसी से मिल सकता है। आईआईटी कानपुर और वैज्ञानिकों की नई स्टडी में फॉल्ट लाइन पर बड़े निर्माण को गंभीर खतरा बताया गया है।
READ MOREप्रदेश में राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया नए साल से पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आवेदन से लेकर पात्रता जांच, सत्यापन, वितरण और राशन विक्रेताओं के भुगतान तक हर चरण डिजिटल हो। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
READ MOREदिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का सबसे अहम एलिवेटेड हिस्सा आधी रात से ट्रायल के लिए खोल दिया गया है। इसके खुलने से खेकरा से दिल्ली के अक्षरधाम तक सफर पहले से तेज़ और आसान होगा। अब दिल्ली से 32 किमी का रास्ता मिनटों में पूरा किया जा सकेगा। जल्द ही यह सड़क सहारनपुर तक भी जुड़ जाएगी, जिससे यात्रा में बड़ी राहत मिलेगी।
READ MOREदेहरादून की पहाड़ियों में अब एक नई कहानी लिखी जा रही है साहस, आत्मनिर्भरता और आर्थिक आज़ादी की। जहां कभी महिलाएँ सिर्फ़ घर की ज़िम्मेदारियों तक सीमित थीं, अब वही महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बनकर पूरे ज़िले की किस्मत बदलने निकल पड़ी हैं।
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उत्तराखंड की नदियाँ अवैध खनन के कारण भीतर से खोखली होती जा रही हैं। नदी तल से छेड़छाड़ ने बाढ़, भूस्खलन और गाँवों की असुरक्षा को बढ़ा दिया है। केदारनाथ से जोशीमठ तक की आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश भविष्य को संकट में डाल रहा है।
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सीडीएस जनरल अनिल चौहान का नेतृत्व शांति, स्पष्ट सोच और दूरदृष्टि पर आधारित है। वे युद्ध को हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, समन्वय और रणनीति से जीतने में विश्वास रखते हैं। तीनों सेनाओं के एकीकरण के जरिए वे भारत की सैन्य शक्ति को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।
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